मेरे बारे में

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The only thing I really wish to do with my life is to inspire someone. I want to touch someone’s life so much that they can genuinely say that if they have never met me then they wouldn’t be the person they are today. I want to save someone; save them from this cold, dark and lonely world. I wish to be someone’s hero, someone that people look up to. I only wish to make a change, even if it’s a small one. I just want to do more than exist.
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गुरुवार, 1 नवंबर 2012

खंडहर



                                                                कल थी आलीशान इमारत ,
                                                                आज  वहां  सिर्फ  खंडहर  हैं ।

                                                                रोज़ सुबहो-शाम ज़हाँ पर,
                                                                पंछी   चहका   करते   थे ।

                                                                 भंवरे की गुंजन से सारे, 
                                                                 फूल वो महका करते थे ।

                                                                 किस्से कई सुने थे हमने,
                                                                 तराने कई सुने थे हमने ।

                                                                 इस ईमारत के गलियारों में,
                                                                 अफसाने कई सुने थे हमने ।

                                                                छाई  है  वहां  आज  ख़ामोशी,
                                                                और दूर तक पसरा सन्नाटा है ।

                                                                 उठते हुए देखो वो कैसे ,
                                                                 धूल   के   बवंडर   हैं ।

                                                                 कल  थी आलीशान  ईमारत,
                                                                 आज  वहां  सिर्फ  खंडहर  हैं ।

बुधवार, 25 जनवरी 2012

जी चाहता है......

बहुत रह लिए ज़मीं पर अब ,
आसमां में उड़ने को जी चाहता है !!

बहारें जब छा जाती हैं चमन में ,
गीत कोई गुनगुनाने को जी चाहता है !!

कभी दायरों में सिमट जाती है जिंदगी ,
कभी सारे बंधन तोड़ने को जी चाहता है !!

कभी दुश्मनों पर आता है गुस्सा ,
कभी उन्हें दोस्त बनाने को जी चाहता है !!

हर पल ऊपर वाले का नाम आता है जुबां पे ,
कभी उसके पास जाने को जी चाहता है !!

कभी ये दुनिया लगती है अच्छी ,
कभी जिंदगी से भाग जाने को जी चाहता है !!

याद उनकी कभी जाती नहीं दिल से ,
जिन्हें अपना बनाने को जी चाहता है !! 

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

इन्तजार.........

जवां रात के सीने पे ............
दुधिया आंचल मचल रहा है.......
किसी हसीं ख्वाब की तरह......
हंसीं फूल....
हंसीं पत्तियां......
हंसीं शाखें ........
लटक रही हैं ..........
पेड़ों से........
किसी नाजनीं की तरह ........
आज फिर वो हंसीं लम्हें मुझसे मिलने आयें हैं.........
तेरे होठों पर तबस्सुम की हल्की सी लकीर..........
मेरे ख्वाब में रह-रह कर झलक रही है ...........
तेरे कांपते होंठों की जादू भरी हंसीं.....
मेरे सीने में कोई जाल बुन रही है.........
तू नज़रें झुकाय.....
खुद अपने कदमों की आहट से झेंपते हुए........
डरते हुए........
फूल चुन रही है.......
मै धड़कते दिल से........
खुदा से फरियाद कर रहा हूँ .........
कि मेरे आरजू के कँवल .......
खिल कर फूल हों जाएँ .........
दिले- नज़र की दुआएं मेरी कबूल हों जाएँ .........
जुबां मेरी खुश्क हैं ........
आवाज रूकती सी जाती है........
न जाने आज मै क्या बात कहने  वाला हूँ........
तुम अपनी धुन में फूल चुनती जा रही हो.........
दबे सुरों में शायद........
कोई गीत गुनगुना रही हो......
रोज़ की तरह आज भी तारे........
सुबह की गर्द में खो रहे हैं ...........
ये तन्हाई की घड़ियाँ ........
किसी नागिन की तरह मुझे डस रही हैं........
जहां में हुस्न की ठंडक का असर हो रहा है.........
दूर वादियों में दूधिया बादल ...........
झुक कर पर्वतों को प्यार कर रहे हैं.........
दिल में नाकाम हसरतों को लिए........
हम तेरा इन्तजार कर रहे हैं......

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

ख्यालों के गुल


Image: Evgeni Dinev / FreeDigitalPhotos.net
फूलों की घाटी ,
झरनों की वादियाँ ,
बर्फ की बारिश..........
ढेरों चित्र आँखों में कैद थे........
तुम्हारे साथ गुज़ारा,
हर लम्हा दिल की जागीर था.....
यादों का आलम यह था कि,
रेत पर तुम्हारा नाम कब लिख दिया ,
पता ही न चला.........
फिर उसे सीपियों से सजाया और ,
अपने आँचल में उसे छुपा लिया.........
शायद यही चाहत है,
कि, ख्यालों के गुल ,
किताब में उतर आये हैं ........... 

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

वो ख्वाब फिर, अधूरे रह गुए .........

वो ख्वाब फिर ,
        अधूरे रह गए !!
सोचा था, 
        वो आयेंगे ,
राह पे उनकी ,
        हम चाँद-तारें बिछायेंगे ,
फूलों से उनकी ,
        सेज को सजायेंगे ,
वो न आये ,
इंतज़ार हम करते रह गए !!
दिल के ज़ज्बात ,
        दिल में ही रह गए !!

वो ख्वाब फिर, 
          अधूरे रह गुए !!


सोचा था,
         वो आयेंगे ,
ढेर सारे पल ,
         साथ बिताएंगे ,
उन पर हम अपनी ,
         जान लुटाएंगे ,
वो न आये ,
हसरतों को हमारी,
          वो रुसवा कर गए !!
न जाने वो ,
          कहाँ खो गए !!

वो ख्वाब फिर ,
          अधूरे रह गए !! 

गुरुवार, 7 जुलाई 2011

बारिशों के मौसम में......



कुछ ख्वाब से उभर आए है,                        
बारिशों   के   मौसम    में .


               अरमां दिल में जग आए है ,
               बारिशों   के   मौसम   में .

                           ज़हन में वो याद आए हैं,
                           बारिशों  के  मौसम  में .


                                               आंखे  भीग  आई   हैं ,
                                               बारिशों के मौसम में .


                                                          पल जो कल साथ बिताये थे,
                                                          बारिशों    के    मौसम   में .


                                                                   आज फिर नज़रों में छाए हैं,
                                                                   बारिशों   के   मौसम   में .


                                                                                फूलों पर बिखरी है शबनम
                                                                                बारिशों   के   मौसम   में .


                                                                                                   बूँदे बनी हैं आज दुल्हन
                                                                                                   बारिशों   के   मौसम   में 

गुरुवार, 16 जून 2011

जनता की आवाज

आज देश में 
भ्रष्टाचार के खिलाफ
एक आंधी सी आई है ,

सारे लोगों ने मिलकर 
रिश्वतखोरी के खिलाफ 
एक आवाज उठाई है ,

अपने देश की दौलत को 
चन्द गद्दारों ने लूटकर 
विदेशों में जमा कराई है ,

इन नेताओं ने देश की आन 
मिटटी में मिलायी है ,

जो काम पहले अंग्रेज कर गए 
वही आज ये गद्दार 
कर रहे हैं ,

जनता के पैसों से अपनी 
जेबें भर रहें हैं 

देश की जड़ों को 
खोखला कर रहे हैं ,

ऐसे देश के गद्दारों को 
हमें सबक सिखाना होगा ,

इनका सर मुंडवा कर 
मुंह काला कर  
गधे पर बैठाना होगा ,

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे 
और भी लोगों को 
सामने लाना होगा ,

एक नया कानून देश में 
बनाना  होगा ,

विदेशों में जमा काला धन 
वापस लाना होगा ,

देश को फिर एक 
सोने की चिड़िया बनाना होगा .

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

हर आसमां में सितारे नहीं होते

हर आसमां में सितारे नहीं होते ,
हर समंदर में किनारे नहीं होते ,
हर नज़र से इशारे नहीं होते ,
हर बहार में नज़ारे नहीं होते ,
हर पार्क में फुव्वारे नहीं होते !

हर जाम के पैमाने नहीं होते ,
सभी हसीनो के दीवाने नहीं होते ,
हर गम के फसाने नहीं होते ,
हर रास्ते अनजाने नहीं होते ,
कुछ दोस्त कभी पुराने नहीं होते !

हर पत्थर चमकदार नहीं होते ,
हर फूल खुशबूदार नहीं होते ,
हर दोस्त वफादार नहीं होते ,
हर दिलबर दिलदार नहीं होते ,
हर इक लोग होशियार नहीं होते !

हर दामन में दाग नहीं होते ,
हर समुद्रतट पर झाग नहीं होते ,
हर फूल गुलाब नहीं होते ,
हर तीर दिल के पार नहीं होते ,
हर हुस्न लाजवाब नहीं होते !

इश्क में कुछ लोग बर्बाद नहीं होते ,
शहर में सभी आबाद नहीं होते ,
हर ख़त के जवाब नहीं होते ,
हर हसीनाओं के शबाब नहीं होते ,
हर नज़रों में ख्वाब नहीं होते ! 

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

जब हम मुस्कुराते हैं


जब हम मुस्कुराते हैं ,
तो वो नज़रें चुराते हैं !

उनकी इस अदा को हम ,
समझ नहीं पाते हैं !

कोशिश तो बहुत करते हैं ,
पर उन्हें मना नहीं पाते हैं !

फुरसत के पलों में वो ,
बहुत याद आते हैं !

उनसे मुलाकात के तरीके ,
हम ढूंढते रह जाते हैं !

उनकी याद में हम जो ,
गीत लिखते जाते हैं !

सुनाना उन्हें चाहते हैं पर ,
खुद ही गुनगुनाने लग जाते हैं !

उनकी याद में हम ,
रात-रात भर जागते हैं !

कैसे उन्हें आपना बनाएं ,
यही सोचते रह जाते हैं ! 

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन.........

ये डिग्री भी लेलो , ये नौकरी भी लेलो ,
भले  छीन  लो  मुझ  से मेरी जवानी ,
मगर मुझ को लौटा दो , वो स्कूल की कैंटीन ,
वो ब्रेक-टाइम, वो छुट्टी, वो दोस्ती, वो यारी,

कड़ी  ठण्ड  में , अपने घर से निकलना, 
ट्यूशन्स  की खातिर शहर में भटकना,
वो स्कूल में  दोस्तों  की खिल्ली उड़ाना,
टीचर्स को चिड़ाना,वो एरोप्लेन्स उड़ाना,

वो एग्जाम्स की रातों का जगना-जगाना ,
बीमारी की अप्पलीकेशन में झूठा बहाना,
वो पेपर्स की कहानी, प्रेकटीकल्स का किस्सा ,
वो  माँ  की  दुआएं , टीचर्स  का  भरोसा,

यारों के साथ वो लम्बी सी रातें,
वो दोस्तों से कैंटीन में प्यारी सी बातें,
वो हर एक दिन का लड़ना झगड़ना,
आपस में यूँही हमेशा का अकड़ना,

भुला नहीं सकता है कोई ,
वो स्कूल,वो टीचर्स,वो शरारतें,वो कहानी.

बुधवार, 15 दिसंबर 2010

ये क्या हो रहा है , बापू तेरे देश में !


                                                 
ये क्या हो रहा है ,
बापू  तेरे  देश  में !
अमन-चैन खो रहा है ,
बापू  तेरे  देश  में !


राम की इस धरती का ,
हो  रहा  है  अपमान ,
इन्सान सो रहा है ,
बापू  तेरे  देश  में !
ये क्या हो .............


इन्सान बन बैठा है ,
इंसानियत का दुश्मन ,
कटुता के बीज बो रहा है ,
बापू  तेरे  देश  में !
ये क्या हो .............


शहीदों की कुर्बानियों को,
भूल चूका है इन्सान ,
दौलत पराई लूट रहा है ,
बापू  तेरे  देश  में ! 
ये क्या हो ..............


इस मिटटी की शान को ,
वो कर रहा है बदनाम ,
इमान अपना बेच रहा है ,
बापू  तेरे  देश  में !
ये क्या हो .................


देश की आबो-हवा ,
रोज़ बदल रही है ,
जीना मुश्किल हो रहा है ,
बापू  तेरे  देश  में !
ये क्या हो ................

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

कितना बदल रहा इंसान

चंद रुपयों की खातिर अपना,
                          ईमान  बेच  रहा  इंसान !
पैसे की अंधी दौड़ में कितना ,
                          आगे निकल रहा इंसान !
कितना  बदल  रहा  इंसान ,
                          कितना बदल रहा इंसान !

है झूठ का चोला ओढ़े ,
                          लेकिन बन रहा अनजान !
देश के दामन  में करता ,
                          गहरी  चोट  का  निशान !
कितना बदल रहा इंसान 
                          कितना बदल रहा इंसान 

मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारों ,
                          को  कर  रहा  बदनाम !
चोरी डकैती हत्या बलवा ,
                          करके बन रहा शैतान !
कितना बदल रहा इंसान 
                          कितना बदल रहा इंसान 

रिश्ते-नाते भूला सब कुछ ,
                          है   ये   कैसा   अज्ञान ,
भ्रस्टाचार के दलदल में फँसकर ,
                          कर रहा खुद को बदनाम !
कितना बदल रहा इंसान ,
                          कितना बदल रहा इंसान !

एक नया भारत बनायें

आओ हम मिलकर एक,
नया     भारत   बनायें!!
                            जात-पात , उंच-नीच , ईर्ष्या ,
                            को     जड़     से     मिटायें !!
भेद-भाव, वैमनस्य , क्रोध,
को  जीवन  से  दूर  भगाएं!!
                             अहिंसा,भाई-चारा,प्रेम का सन्देश,
                             सभी             को          सिखाएं!!
हम     सब      एक     हैं,
मिल कर यह नारा लगायें!!
                              आने वाली अगली पीढ़ी को,
                              एक   नयी   राह    बताएं  !!
राम-रहीम  के आदर्शों पर ,
हम      चलकर    दिखाएँ !!
                               सर्व-धर्मं    के   प्रति   हम ,
                                मन में एक ही भावना जगाएं !!
सारे भारतवासियों के दिलों में ,
एक  नयी  ज्योत  जलाएं !!
                                आओ  हम  मिलकर  एक ,
                                नया      भारत      बनायें !!
        

        

वक़्त नहीं

हर ख़ुशी है लोगों के दामन में
पर एक हंसी के लिए वक़्त नहीं ,

दिन रात दौड़ती दुनिया में 
ज़िन्दगी के लिए ही वक़्त नहीं,

माँ की लोरी का एहसास तो है पर 
माँ को माँ कहने के लिए वक़्त नहीं ,

सारे रिश्तों को तो हम मार चुके 
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं ,

सारे नाम मोबाइल में हैं पर 
दोस्ती के लिए वक़्त नहीं ,

गैरों की क्या बात करें जब 
अपनों के लिए ही वक़्त नहीं ,

आँखों में है नींद बड़ी पर
सोने का ही वक़्त नहीं ,

दिल है ग़मों से भरा हुआ पर 
रोने का भी वक़्त नहीं ,

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े 
की थकने का भी वक़्त नहीं ,

पराये एहसासों की क्या कदर करें जब 
अपने सपनो के लिए ही वक़्त नहीं ,

तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
इस ज़िन्दगी का क्या होगा ,
की हर पल मरने वालों को ,
जीने के लिए भी वक़्त नहीं ,

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नेता का पहाडा

नेता     एकम     नेता 
नेता     दूनी       दगाबाज 
नेता     तियां      तिकड़मबाज 
नेता     चौके      चार सौ बीस 
नेता     पंजे        पंजाधारी 
नेता     छके       छैलचिकनिया   
नेता     सत्ते        सत्ताधारी 
नेता     अट्ठे      अड़ंगाबाज 
नेता     नेता        नमकहराम 
नेता     दहमन    सत्यानाश 

ये जिंदगी

          कभी   तो   बहुत,
          हँसाती ये जिंदगी !

                                   और कभी बहुत,
                                    रुलाती ये जिंदगी !

            रोज़ नए सपने ,
            दिखाती ये जिंदगी !

                                    सच्चाई का सामना ,
                                    कराती ये जिंदगी !

             नए-नए रिश्ते 
             बनाती ये जिंदगी !

                                     टूटे  दिलों  को ,
                                     मिलाती ये जिंदगी !

             बहुत ज्यादा इंतज़ार ,
             कराती ये जिंदगी !

                                      अपने पन  का अहसास ,
                                       कराती ये जिंदगी !

              जीवन में नए रंग ,
              लाती ये जिंदगी !

                                       प्रेम का संदेश ,
                                       सुनाती ये जिंदगी !

              जीने का सलीका ,
              सिखाती ये जिंदगी !

                                         प्यार से अपना ,
                                         बनाती ये जिंदगी ! 

                एक नयी राह ,
                दिखाती ये जिंदगी !