मेरे बारे में

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The only thing I really wish to do with my life is to inspire someone. I want to touch someone’s life so much that they can genuinely say that if they have never met me then they wouldn’t be the person they are today. I want to save someone; save them from this cold, dark and lonely world. I wish to be someone’s hero, someone that people look up to. I only wish to make a change, even if it’s a small one. I just want to do more than exist.
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शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

मै वो शख्स हूँ जिसने यहाँ इंसान बदलते देखा है

इस शहर में लोगों का इमान बदलते देखा है ,
मै वो शख्स हूँ जिसने यहाँ इंसान बदलते देखा है !!

लोग तरसते रह जाते हैं एक आशयाने के लिए ,
मैंने तो  उन्हें रोज़ एक मकान बदलते देखा है !!

लोग वादा करते हैं जिन्दगी भर साथ निभाने का,
मैंने तो जनाजे में भी लोगों को कंधे बदलते देखा है !!

क्यों मायूस होते हो,जरा-जरा सी बातों पर ,
मैंने तो तूफानों में भी चिराग जलते देखा है !!

पानी की एक-एक बूँद को यहाँ लोग तरसते हैं,
वहां मैंने समंदर पर बादलों को बरसते देखा है !!

लोग तो शरीफ होने का बस दम भरते हैं ,
मैंने लोगों को गिर-गिर सँभलते देखा !!

क्यों, उन्हें अपने होने का इतना गुरुर है ,
मैंने तो पहाड़ों को भी टूट के बिखरते देखा है !!

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

सैर करो बागों के , बाज़ार में क्या रखा है

सैर करो  बागों  के , बाज़ार  में  क्या  रखा  है !
क़त्ल कर दो निगाहों से, तलवार में क्या रखा है !!
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निगाहों का वार क़यामत का वार होता है !
हर  एक  तीर  कलेजे  के  पार  होता  है !!
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यह तो मुमकिन नहीं कि हर कोई बनाये ताजमहल !
मगर  हर  दिल  में एक  मुमताज़ महल  रहती  है !!
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संग-ऐ-मर्मर की तरह साफ़, मोहब्बत हो अगर !
एक  दिन  ताजमहल  बनके  दिखा  देती  है !!
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लोग हर मोड़ पर रुक-रुक कर संभलते क्यों हैं !
इतना  डरते  हैं  तो  घर से  निकलते  क्यों  हैं !!
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तुम्हें गैरों से कब फुरसत !
हम अपने गम से कब खाली !!
चलो बस हो चुका मिलना !
ना तुम खाली,ना हम खाली !!
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शनिवार, 8 जनवरी 2011

खुदा हमें ऐसी खुदाई ना दे

जिसे सामने देखा, उसे लोग  बुरा कहते हैं !
और जिसे कभी देखा नहीं,उसे खुदा कहते हैं !
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देखकर उसको यूं , हैरान ना हो !
खुदा तुझे भी देगा, परेशान ना हो !
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क्या हमारी खताएं हैं , इतना तो बता दीजिये !
फिर आपकी मर्जी है , जो चाहे सजा दीजिये !
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मै हूँ , सनम हो , और कोई दरम्यां ना हो !
एक दिन खुदा करे, कि खुदा भी वहां ना हो !
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हम एक बात कहेंगे , अगर बुरा ना लगे !
खुदा करे तुझे , इस दौर कि हवा ना लगे !
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खुदा   हमें   ऐसी   खुदाई   ना   दे  !
कि अपने सिवाय , कुछ दिखाई ना दे !
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गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

सारा शहर है पीने वाला

कभी नहीं पड़ सकता यारों , मैखानों में ताला !
एक, दो,चार नहीं, सारा  शहर  है  पीने वाला !
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मंदिर और मस्जिद का झगड़ा यूँ मिटाया जाय !
दोनों   के   बीच  एक ,  मैखाना  बनाया  जाय !
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तेरे कानों  में चुपके से , जो खुद मैंने बयाँ की है !
जमीं वालों से मत कहना, ये बातें आस्मां की हैं !
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सारा शहर था मेरे जनाजे के पीछे !
मगर क्यों तू ना आया मेरे जनाजे के पीछे ?

आता मैं कैसे तेरे जनाजे के पीछे !
तेरे जनाजा जो था, मेरे जनाजे के पीछे !!
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हम पानी की एक-एक बूँद को तरस गए !
और बादल जाकर,समंदर पर बरस गए !
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मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

ज़िन्दगी वेद थी, जिल्द बांधने में कट गयी

सूरज  सरों  पे  आग  उगलता  दिखाई  दे !
मुझको ये शहर आज पिघलता  दिखाई  दे !
मै  इस  नदी  के  पार  उतर जाऊंगा  मगर !
आगे कोई  चिराग  तो  जलता  दिखाई  दे !!
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मेरे  दिल  कि  राख  कुरेद  मत !
इसे  मुस्करा  के  हवा  न  दे  !
ये  चिराग  फिर  भी  चिराग है ! 
कहीं  तेरा  हाथ  जला  न  दे !
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बदल  गए  हैं  वो  खुद , मौसमों  कि तरह !
जो कह रहे थे , कि मौसम बदलने वाला है !
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हमने  एक  शाम  चिरागों  से  सजा  रखी  है !
शर्त  लोगों  ने  हवाओं  से  लगा  रखी  है !
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गुमान  नहीं  होता,  कि  तुम  बहुत  दूर  हो !
यह नहीं जानता मै, कि तुम क्यों मजबूर हो !
हर  तमन्नाओं  को  दफन  करके  बैठे  हो !
नहीं  शिकवा  तुमसे  कि  तुम  तो बेकसूर हो !
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कितना मै गम उठाऊं,  इस ज़िन्दगी  के  साथ !
हूँ उदास अपने दिल से बेजार,ज़िन्दगी के साथ !
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रविवार, 5 दिसंबर 2010

लहरों से खेलता हुआ , लहरा के पी गया !

लहरों से  खेलता  हुआ , लहरा  के  पी  गया !
साकी की हर निगाह पे ,बल खा के पी गया !!
मैंने तो  छोड़ दी  थी , पर रोने लगी शराब !
मैं उसके आंसुओं पे तरस खा के पी गया !!
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मंदिर और मस्जिद का झगडा यूँ मिटाया जाय !
दोनों  के  बीच  एक  मैखाना  बनाया  जाय !!
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ये हमने आज से तय कर लिया , कि हम तुझको !
करेंगे   याद   कि   जब   तक   भूला   नहीं   देंगे !
शराब  पीके  बड़े  तजुर्बे  हुए  हैं  हमें !
शरीफ लोगों को हम मशवरा नहीं देंगे ! 
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बात  साकी की ना  टाली   जाएगी !
करके   तौबा  तोड़  डाली   जाएगी !
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कभी कहा न किसी से  तेरे  अफसाने  को ,
न  जाने कैसे खबर  हो  गयी  ज़माने  को ,
दुआ बहार कि मांगी तो इतने फूल खिले ,
कहीं जगह न मिली  मेरे  आशियाने  को  !
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भूल   शायद  बहुत  बड़ी  कर  ली  !
हमने  दुनिया  से  दोस्ती  कर  ली  !
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गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

आरजू बन के शाम आई है ,



दिल जल जल कर राख हुआ ,
आँखों से  भी रोया  ना  गया ,
जख्म   ही   कुछ   ऐसे   थे ,
फूलों पर भी सोया ना  गया !

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मेरा  दिन  तेरी  रात  से  अच्छा  होगा ,
मेरा दिल तेरे जज्बात से  अच्छा होगा ,
उठेगी  डोली  तो घूँघट उठा कर देखना ,
मेरा जनाजा तेरी बारात से अच्छा होगा !

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चाहे जिसे महफिल में बुला सकते हैं आप ,
हम भी क्या चीज़ हैं ,सितारों को भी ला सकते हैं आप !


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आरजू बन के शाम आई है ,
कुछ इस तरह से बहार छाई है,
जैसे कोई देहात से दुल्हन ,
शहर में पहली बार आई है !


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चोट पर चोट दिल पे खाए हुए ,
होंठ फिर भी हैं मुस्कराए हुए ,
मौत की वादियों में बैठा हूँ ,
जिंदगी की शमा जलाये हुए !


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