मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
The only thing I really wish to do with my life is to inspire someone. I want to touch someone’s life so much that they can genuinely say that if they have never met me then they wouldn’t be the person they are today. I want to save someone; save them from this cold, dark and lonely world. I wish to be someone’s hero, someone that people look up to. I only wish to make a change, even if it’s a small one. I just want to do more than exist.
गज़ल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गज़ल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

ख्वाबों में गुज़रा हुआ कर कल नज़र आएगा .

रखो हौसला , वो मंज़र भी आएगा ,
प्यासे के पास चलकर, समंदर भी आएगा .

थक कर न बैठ, ऐ मुसाफिर ,
मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आएगा .

जिंदगी की राहों में, जब कभी आँखें बंद करोगे ,
तो ख्वाबों में गुज़रा हुआ कर कल नज़र आएगा .

नज़रें दुनिया की, जब कभी तुम्हें तन्हा छोड़ेंगी ,
साथी तुम्हें कोई, दूसरा मिल जाएगा .

मौसम ने ये कैसी, ली है करवट ,
लगता है जैसे, कोई तूफां आएगा .

कश्ती को अपनी संभाल, ऐ मांझी ,
वरना उसे तूफां, बहा ले जायेगा .

बाजारों में रोज़, बिकते हैं ज़ज्बात ,
आज फिर कोई नया खरीदार आएगा .

सारें ज़हां में लोग रहें हंसी-ख़ुशी .
उम्मीद है "विजय" ऐसा भी कोई पल आएगा .

ये ज़िन्दगी एक खेल है और हम सब कठपुतली ,
यहाँ रोज़ एक नया खेल खेला जायेगा .   

बुधवार, 25 जनवरी 2012

जी चाहता है......

बहुत रह लिए ज़मीं पर अब ,
आसमां में उड़ने को जी चाहता है !!

बहारें जब छा जाती हैं चमन में ,
गीत कोई गुनगुनाने को जी चाहता है !!

कभी दायरों में सिमट जाती है जिंदगी ,
कभी सारे बंधन तोड़ने को जी चाहता है !!

कभी दुश्मनों पर आता है गुस्सा ,
कभी उन्हें दोस्त बनाने को जी चाहता है !!

हर पल ऊपर वाले का नाम आता है जुबां पे ,
कभी उसके पास जाने को जी चाहता है !!

कभी ये दुनिया लगती है अच्छी ,
कभी जिंदगी से भाग जाने को जी चाहता है !!

याद उनकी कभी जाती नहीं दिल से ,
जिन्हें अपना बनाने को जी चाहता है !! 

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

मै वो शख्स हूँ जिसने यहाँ इंसान बदलते देखा है

इस शहर में लोगों का इमान बदलते देखा है ,
मै वो शख्स हूँ जिसने यहाँ इंसान बदलते देखा है !!

लोग तरसते रह जाते हैं एक आशयाने के लिए ,
मैंने तो  उन्हें रोज़ एक मकान बदलते देखा है !!

लोग वादा करते हैं जिन्दगी भर साथ निभाने का,
मैंने तो जनाजे में भी लोगों को कंधे बदलते देखा है !!

क्यों मायूस होते हो,जरा-जरा सी बातों पर ,
मैंने तो तूफानों में भी चिराग जलते देखा है !!

पानी की एक-एक बूँद को यहाँ लोग तरसते हैं,
वहां मैंने समंदर पर बादलों को बरसते देखा है !!

लोग तो शरीफ होने का बस दम भरते हैं ,
मैंने लोगों को गिर-गिर सँभलते देखा !!

क्यों, उन्हें अपने होने का इतना गुरुर है ,
मैंने तो पहाड़ों को भी टूट के बिखरते देखा है !!

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

वो मज़ा कुछ और होता है.........







बारिश में भीगने का , मज़ा कुछ और होता है ,
चाहत में मर-मिटने का, मज़ा कुछ और होता है !!

याद जब आये उनकी तो, दिल को मनाने की खातिर,
तन्हाईयों में पीने का, मज़ा कुछ और होता है !!

ये आरज़ू थी हमारी, उन्हें अपनाने की लेकिन,
वो कहते है, हमें सताने का, मज़ा कुछ और होता है !!



अपनों पर सितम तो, हर कोई ढाता है, लेकिन ,
दूसरों पर सितम ढाने का, मज़ा कुछ और होता है !!



पल जीवन के, जो गुज़र जाते हैं, यादें वो पीछे छोड़ जाते हैं,
उन यादों के सहारे जीने का, मज़ा कुछ और होता है !!

मंझधार में तो हर कोई,डूब जाता है लेकिन, 
किनारों पर डूबने का ,मज़ा कुछ और होता है !!   
                           

गुरुवार, 30 जून 2011

रात में ही तो मैखाने आबाद होते हैं......

यहाँ मोहब्बत रोज़ बिकती है सड़कों पर,
इश्क  सरे-आम  निलाम  होता  है  !!

जिंदगी रोज़ लगती है दाँव पर और,
मौत  का  नाम  बदनाम   होता है !!

रात में ही तो मैखाने आबाद होते हैं,
सबके हाथों में फिर जाम होता है !!

दौर  चलता है  जब  पीने-पिलाने का तो,
सबकी जुबां पर हमारा ही नाम होता है !!

उनका  तो  काम  ही  है,  बेवफाई  करना,
मेरे दिल फिर तू क्यों बेवजह परेशान होता है !!

पतझर के मौसम में, अकेला माली क्या करे,
बागों को बसाना तो माली का काम होता है !!

'विजय' तू तो अब बिक चूका है बाजारों में ,
देखें  अब  क्या  तेरा  अंजाम  होता  है !!

रविवार, 19 जून 2011

न पीना आता है,न पिलाना आता है

न  पीना  आता  है,  न  पिलाना आता है ,
हमें तो नज़रों से नज़रें मिलाना आता है !!

और देखो नज़रें मिली भी तो किनसे ,
जिन्हें सिर्फ नज़रों से पिलाना आता है !! 

न ले इम्तेहान मेरी वफ़ा का साकी ,
हमें भी रिश्तों को निभाना आता है !!

चाहे जितना जला ले इस दिल को जालिम,
हमें भी दिल की आग को बुझाना आता है !!

चाहे जितनी भी मुश्किलें आयें रास्तों पर अपने,
हमें तो हर वक़्त सिर्फ मुस्कुराना आता है !!

ऐ खुदा, तेरे दर पर हम आएं भी तो कैसे,
रास्ते में, मस्जिद के पहले तो मैखाना आता है !!

मेरे मांझी, अब तुझ पर एतबार करूँ भी तो कैसे,
तुझे तो सिर्फ कश्ती को डुबाना आता है !!

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

वो तुफानो से नहीं खेला करते , जो नादाँ होते हैं

इन बेजुबां कागजों पर ही तो अफसाने बयां होते हैं !
जो लम्हें गुज़र जातें हैं, उनके बस निशां होते हैं !!


हसीं यादों के दायरों में सिमट जाती है ये ज़िन्दगी !
बस ख्वाहिशें रह जाती हैं , वो मंज़र कहाँ होते हैं !!


उनकी शिकायत है कि उन्हें हम याद नहीं करते !
अरे,उन्हें क्या याद करना,जो जिगर के पास होते हैं !!


गुज़रते हैं रोज़ इन रास्तों से कई मुसाफिर !
ये रास्ते उफ़ तक नहीं करते,वो तो बेजुबां होते हैं !!


जो हमसे टकराना चाहते हैं, क्या वो जानते नहीं !
वो तुफानो से नहीं खेला करते , जो नादाँ होते हैं !!


कुछ लोग जो हमसे बिछड़ जाते हैं,रहते तो वो दूर हैं !
पर  उनके  अहसास,हमारे दिल  के  पास  होते  हैं  !!


अपने वजूद का अब क्या साबुत दे 'विजय' !
मेरे  लफ्ज़  ही,मेरे होने का गवाह होते हैं !! 

रविवार, 12 दिसंबर 2010

ये पत्थरों का शहर है

क़त्ल  कर  दे  निगाहों  से , ऐसा  कातिल  नहीं  मिलता ,
जो बदल दे तुफानो का रास्ता , ऐसा साहिल नहीं मिलता !

ये  पत्थरों  का  शहर है  ,पत्थर दिल  हैं  लोग ,
ठोकरों  के  सिवा  यहाँ  कुछ  नहीं  मिलता !

मंजिल की तलाश में चलते चले जाते हैं लोग,
रास्ते गुम हो जाते  हैं, कारवां  नहीं  मिलता !

गैर  तो  फिर भी गैर  हैं , उनसे  क्या  शिकवा  करें ,
यहाँ अपने बदल जाते हैं, कोई सहारा नहीं मिलता !

उसने  साथ  छोड़ा ,  मुझे  बेवफा  समझकर ,
बेगानों की बस्ती में, अब हमदर्द नहीं मिलता!

मिलते  तो  कई  लोग  हैं ,  राहों  में  गुजरते  हुए ,
जो मंजिल तक साथ चले,ऐसा हमसफ़र नहीं मिलता !

अब  तो  ये  आलम  है ,  तन्हा  रह  गया  'विजय' ,
क्योंकि कश्ती तो वहीँ डूबी थी, जहाँ पानी नहीं मिलता !

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

जब वो सामने से मेरे, मुस्कुराते हुए गुज़र गए !

नज़रों के तीर दिल पे ,
                        चुभाते  हुए   गुजर  गए !
 जब वो सामने से मेरे,
                         मुस्कुराते हुए गुज़र गए !
उनकी शोख अदाओं की ,
                         नजाकत   तो    देखिये  !
भरी भीड़ में तनहा मुझे ,
                         बनाते  हुए   गुजर   गए !
वो   मिले   थे   मुझे  ,
                         बड़ा अजीब इतेफाक था !
उन हसीन  पलों  को वो ,
                         भुलाते  हुए   गुजर  गए !
पल भर का साथ था ,
                         दो   चार  अफसाने    थे !
सब  कुछ  खाक  में ,
                         मिलाते  हुए  गुजर  गए !
खता क्या थी विजय की ,
                        इतना तो बता दिया होता !
क्यों गुरुर में अपने वो ,
                        इतराते   हुए   गुजर  गए !

गज़ल कब होती है

खुशबू जो फूलों पर छाये ,
तो   गज़ल   होती   है !

नज़र से नज़र टकराये ,
तो   गज़ल   होती   है ! 

आँखों से आंसू छलक आये,
तो  गज़ल  होती  है !

देख कर अगर वो मुस्कुराये ,
 तो   गज़ल   होती   है ! 

काली  घटा  जो  छाए,
तो  गज़ल  होती  है !

प्यार से जो अपना बनाये ,
तो  गज़ल  होती  है !

हाल-ऐ-दिल जब वो सुनाये ,
तो   गज़ल   होती   है !

जिंदगी जो रंग दिखाए 
तो  गज़ल   होती   है !

जाम से जाम जब टकराए ,
तो   गज़ल   होती   है !

मदहोशी फिर जो छाये ,
तो  गज़ल   होती   है !

हाथ की लकीरों में तक़दीर दूँढता हूँ

चिरागों  से  रोशनी  का  पता  पूछता हूँ ,
समंदर  से  तूफान  का  पता  पूछता  हूँ !

मुसाफिर  हूँ  एक ,  भटका  हुआ  यारों ,
परछाइयों से खुद अपना पता  पूछता हूँ !

मैं , मेरी  तन्हाई  और  ये  बेखबर  जिंदगी ,
फुरसत के इन पलों में,एक ग़ज़ल  दूँढता हूँ !

कौन अजनबी था, जिसने मेरा कत्ल किया ,
खंजर से उस  कातिल  का   पता पूछता हूँ !

खोये-खोये  से  क्यों ,लग  रहे  हैं  वो आज ,
खामोश  चहरे पे उनके  एक हंसी  दूँढता हूँ !

फिजाओं  में  छाई  है , ये  कैसी  विरानियाँ ,
पतझड़  में   बहारों   का   पता  पूछता  हूँ  !

जाने क्या लिखा है ,विजय की किस्मत में यारों ,
इस  हाथ  की  लकीरों  में,  तक़दीर  दूँढता  हूँ !